ओ मुरली, तू है तितली रानी,
रंग-बिरंगी, तू बड़ी मस्तानी।
ओ मुरली, तू है परी सुहानी,
प्यार लुटाती, तू प्रेम दीवानी।
ओ मुरली, तू है स्वर बहुरंगी,
प्रेम से भरी तू मीठी कहानी।
मुरली, मुरली, बाबा की प्यारी,
सुनते ही जगे चेतना हमारी।
हर दिन सुनें, बनें हम ज्ञानी,
शिव बाबा की तू रसभरी वाणी।
ओ मुरली, तू है मधुर रागिनी,
रोशन करे मन की वीरानी।
ओ मुरली, तू है हरियाली,
महकाए बगिया सदा हमारी।
ओ मुरली, तू है शीतल चाँदनी,
ताप हर ले, सुख-दायिनी।
मुरली, मुरली, बाबा की प्यारी,
सुनते ही जगे चेतना हमारी।
हर दिन सुनें, बनें हम ज्ञानी,
शिव बाबा की तू रसभरी वाणी।
ओ मुरली, तू है धुन वरदानी,
भर दे मन में शक्ति रूहानी।
ओ मुरली, तू है मधुर चेतावनी ,
चलने न दे कोई मनमानी।
ओ मुरली, तू है विश्व-कल्याणी,
शिव बाबा-सी तू पतित-पावनी।
मुरली, मुरली, बाबा की प्यारी,
सुनते ही जगे चेतना हमारी।
हर दिन सुनें, बनें हम ज्ञानी,
शिव बाबा की तू रसभरी वाणी।
ओ मुरली, मुरली, तू सतवाणी,
ओ मुरली, मुरली, तू प्रेमवाणी,
ओ मुरली, मुरली, तू योगवाणी,
ओ मुरली, मुरली, तू ज्ञानवाणी,
ओ मुरली, मुरली, तू दिव्यवाणी ,
ओ मुरली, मुरली, तू परमात्मा की वाणी....
