"ओ वतन के फरिश्ते, ओ वतन के फरिश्ते
छिपे तुम कहां,ढूंढती है नज़र,
पाएं तुमको कहां, तुम कहां,तुम कहां
ओ वतन के फरिश्ते,छिपे तुम कहां
ढूंढती है नज़र,पाए तुमको कहां,
तुम कहां, तुम कहां, छिपे तुम हो कहां
ठहर पाया नहीं क्या कि जी भर के
आआआआ .....
ठहर पाया नहीं क्या कि जी भर के
चल दिए तुम कहां प्यारे बाबा मेरे
आंसुओ की गली,तेरी राहें खड़ी
देखते-देखते,ओ वतन के फरिश्ते
छिपे तुम कहां
ढूंढती है नज़र, पाएं तुम को कहां
तुम छिपे हो कहां
तुम कहां, तुम कहां
तुम तो भटके थे, दुःखों के संसार में
आआआआ........
तुम तो भटके थे दुःखों के संसार में
तुने जीना सिखाया हमें प्यार से
ज्ञान ज्योति मिली,दिल की दुनियां बसी
प्यारे बाबा मेरे, प्यारे बाबा मेरे
ओ वतन के फरिश्ते, छिपे तुम कहां
ढूंढती है नज़र, पाएं तुमको कहां
तुम कहां, तुम कहां, तुम कहां, तुम कहां
तुमने आकर के हमको, सहारा दिया
आआआआ ....
तुमने आकर के हमको सहारा दिया
डूबे दुखियों को तूने किनारा दिया
मिल गईं ज़िन्दगी, पाई हमने खुशी
तुम कहां, तुम कहां, तुम कहां, तुम कहां
ओ वतन के फरिश्ते, छिपे तुम कहां
ढूंढती है नज़र, पाएं तुमको कहां
तुम कहां, तुम कहां, तुम कहां .....
