

परम पिता ने हमको तो एक बात यही बतलाई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है परम पिता ने हमको तो एक बात यही बतलाई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है जब समान के सिंहासन से देह भान मे आते हो शान से अपने परे जो होते परेशान हो जाते हो छोटी सी है बात मगर इसमें कितनी गहराई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है परम पिता ने हमको तो एक बात यही बतलाई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है तुम ही तो पावन पूज्य थे जिनकी पूजा घर घर होती है तुम जागे दुनियां जागी तुम सोए दुनियां सोती है जागो और जगाओ फिर जगने की बेला आई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है परम पिता ने हमको तो एक बात यही बतलाई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है आतम चिंतन जरूरी है आतम परिवर्तन के लिए आतम परिवर्तन जरूरी जग परिवर्तन ले लिए अंतरमन है समुंदर जिसमे अनंत निधि समाई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है परम पिता ने हमको तो एक बात यही बतलाई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है स्वचिंतन सुखदायी है पर चिंतन पतन बुराई है