संसार को अपने इतिहास का पूरा ज्ञान नहीं है। मनुष्य आत्माओं के साथ-साथ परमात्मा का भी इस सृष्टि चक्र में दिव्य पार्ट है, यह बहुत कम लोग जानते हैं। बाबा आकर हमें सृष्टि चक्र का सत्य ज्ञान देते हैं।
यह विश्व-नाटक पहले भी चलता आया है और आगे भी चलता रहेगा। दुनिया पतन की ओर बढ़ती है, पर लोग इसके गहरे रहस्य को नहीं समझ पाते।
लोगों को यह ज्ञात नहीं कि परमात्मा कब आते हैं। जब संसार में दुःख, अशांति, अनेक मत और समस्याएँ बढ़ जाती हैं, तब वे संगमयुग पर आकर सत्य ज्ञान देते हैं।
परमात्मा ही स्वर्ग के रचयिता हैं। वे नई सृष्टि की स्थापना करते हैं, नया जन्म देते हैं और बच्चों को सुख-शांति का वर्सा देते हैं।
परमात्मा भारत में इसलिए आते हैं क्योंकि यही दैवी संस्कृति और प्राचीन सभ्यता की भूमि है। वे मनुष्य को देवता बनाने आते हैं।
जब संसार में अशांति, युद्ध और समस्याएँ बढ़ती हैं, तब परमात्मा ज्ञान देकर सबकी जिज्ञासाओं और समस्याओं का समाधान करते हैं। सत्य ज्ञान से ही सद्गति मिलती है।
संगमयुग वह श्रेष्ठ समय है जब कलियुग समाप्त होकर सतयुग का आरंभ होता है। अतः इस अव्यक्त वर्ष में हमें अव्यक्त स्थिति बनानी है।
