परमात्म संग का रंग सबसे ऊँच महान
इसी रंग में रंग के बने पावन जीवन
संगम युग में हर दिन, हर पल है खुशहाली
परमात्म संग में रंग के, हर दिन ही मनाए होली
परमात्म संग का रंग सबसे ऊँच महान
अंतरा – 1
समय संकल्प एक भी व्यर्थ ना जाए कभी
बीती सो बीती करके खत्म करें अभी
बाबा ही साथी तो होगा हर पल भी सफल
21 जन्म की प्रारब्ध में होंगे मालामाल
संगम युग की हर घड़ी है कई जन्मों के समान
परमात्म संग का रंग सबसे ऊँच महान
अंतरा – 2
माया जीत, प्रकृति जीत हम, सदा विजय है अपनी
सतोगुणी हों संकल्प अपने, प्रकृति भी बने सतोगुणी
संगम युग है अमृतवेला, फिर आएँ स्वर्णिम सवेरा
उसमें होगा राज अपना, सुखदाई वो अति प्यारा
मनसा सेवा से शुभ संकल्प का करना है दान
परमात्म संग का रंग सबसे ऊँच महान
अंतरा – 3
दुखियों पर रहमदिल बन, सबका सहारा है बनना
प्रभु प्राप्तियाँ जो हमें मिलीं, सबको बाँटना
बाबा और अपना परिवार, भिन्न-भिन्न हों भले संस्कार
संस्कार मिलन की रास करे, यही है सच्चा प्यार
तब ही बाबा से मिलेगा हमको प्यारा इनाम
परमात्म संग का रंग सबसे ऊँच महान
इसी रंग में रंग के बने पावन जीवन
संगम युग में हर दिन, हर पल है खुशहाली
परमात्म संग में रंग के, हर दिन ही मनाए होली
परमात्म संग का रंग सबसे ऊँच महान
