परमात्म प्यार के पात्र हैं हम प्यार में ही में खोए रहते हैं
प्यार के सुखदाई झूले में सदा ही आनंदमय जीवन हम जीते है
निर्बल को भी प्यार शक्तियो से भर देता
जनम जन्मों के सारे हमारे दुख हर लेता
रहे लवलीन हो जो इसमें उसे डर ही किसका
माया को भी पल में शक्ति हीन कर देता
खतम हो रहा राज्य माया का खुशी से विदाई लेते है
परमात्म प्यार के पात्र हैं हम प्यार में ही खोए रहते हैं
भरोसा हो एकबल तब ही बल है मिलता
दृढ़ निश्चय के आगे किसी का जोर ना चलता
समस्या के ये बादल ठहरने वाले नहीं
जो त्रिकालदर्शी है वहीं सब राज जानता
स्नेह हर्ष शुभ भावना से हम दिल बंध
कारण को निवारण में बदलते है
परमात्म प्यार के पात्र हैं हम प्यार में ही खोए रहते हैं
सदा ही याद और सेवा के उत्साह में रहना
रोते हुए कोई आए उसे उत्साह में लाना
ना हो नकारात्मक भाव ना हो व्यर्थ की बाते
की ये परिवर्तन करके हमें नाम है पाना
स्नेह शक्ति सभी को देना सदा
बाबा यहीं हमें कहते है
परमात्म प्यार के पात्र हैं हम प्यार में ही खोए रहते हैं
प्यार के सुखदाई झूले में सदा ही आनंदमय जीवन हम जीते है
