पवित्र धन, पवित्र मन
पवित्र धन, पवित्र मन,
पवित्र हो हर भावना।
बाबा का है, बाबा के लिए,
यही रहे शुभ कामना॥
ना मेरा है, ना तेरा है,
सब उसकी अमानत है।
मैं मालिक नहीं, मैं निमित्त हूँ,
यही सच्ची इबादत है॥
पवित्र धन, पवित्र मन,
पवित्र हो हर भावना।
धन हाथों में रहे सदा,
पर दिल में घर न कर पाए।
साधन बनकर साथ चले,
पर मालिक कभी न बन जाए॥
न लोभ रहे, न मोह रहे,
न मन में कोई कामना।
न स्वार्थ रहे, न चाह रहे,
बस रहे, श्रेष्ठ भावना॥
पवित्र धन, पवित्र मन,
पवित्र हो हर भावना।
जो आया है, वो जाना है,
फिर किस बात की अकड़ रहे?
जो मिला है, वो खो जाना है,
क्यों धन से इतना राग रहे?
कम हो या फिर अधिक मिले,
मन की मौज न कम हो कभी।
धन घट जाए, धन बढ़ जाए,
मेरी शांति न घटे कभी॥
पवित्र धन, पवित्र मन,
पवित्र हो हर भावना।
धन से मेरी कीमत नहीं,
मैं आत्मा अनमोल हूँ।
वैभव से पहचान नहीं,
मैं स्वयं में अडोल हूँ॥
चाहे खाता भरा रहे,
या खाली हो जाए कभी।
दिल का खाता भरता जाए,
दुआओं से हर घड़ी॥
पवित्र धन, पवित्र मन,
पवित्र हो हर भावना।
बाबा का है, बाबा के लिए,
यही रहे शुभ कामना॥
