

पवित्रता के हम ताजधारी हैं । अपनी चमक , सब से न्यारी है । जैसे तारे गगन में चमकते सभी , उनमें भी किसी की चमक है घनी । वैसे अपने घर परमधाम में , हम आत्माओं की तेज है रौशनी। हमको प्यारे बाबा से मिली है पहचान , मिली है पहचान , ये पहचान । पवित्रता की शक्ति से ही बने हम महान , बने हैं महान , बने हम महान। आदि काल में बने हम देवता । हम जैसा पावन नहीं कोई सदा । मध्यकाल द्वापर से आज तलक , मंदिर में मूर्ति अपनी पूजे सभी । अपनी ये झलक है सबसे हसीन , पूजनयोग्य बनती है अपनी छबि । अपने दैवी स्वरूप का हो रहा गुणगान , हो रहा गुणगान, सदा गुणगान । पवित्रता की शक्ति से ही बने हम महान , बने हैं महान , बने हम महान। पवित्रता से ही प्रभु प्यार मिला । सर्व प्राप्तियों से जीवन है खिला । वृति में हो सब के लिए शुभ भावना , आत्मिक दृष्टि से ही सब को देखना । सदा हो चलन में रूहानी नशा , कर्म द्वारा सबको सुख ही देना । बनना है हमको ब्रह्मा बाबा के ही समान, बनें बाबा समान , बाबा समान । पवित्रता की शक्ति से ही बने हैं महान , बने सबसे महान , दैदीप्यमान ।