प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
वो कौन जिससे प्रभु तुम्हे प्यार है नहीं
तुम्हे प्यार है नहीं
प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
भूलो पे भूल करके नहीं खुद कबूल करते
तुम हो क्षमा के सागर चितपे न अपने धरते
चितपे न अपने धरते
करुणामयी नजरमें कम दुलार है नहीं
दुलार है नहीं
प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
ये चन्द्र सूर्य सारे धरती गगन सितारे
ये लुत्फ ये नजारे जलवे है सब तुम्हारे
जलवे है सब तुम्हारे
कैसे कहूं की होता है दीदार क्यों नहीं
दीदार क्यों नहीं
प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
रहते हो तुम कहीं पर रहती नजर है हमपर
वरदानी हाथ तुम्हारे रहते हमारे सिरपर
रहते हमारे सिरपर
सदा साथ को करे न क्यों साकार है नहीं
साकार है नहीं
प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
वो कौन जिससे प्रभु तुम्हे प्यार है नही
तुम्हे प्यार है नही
प्रभु आप की उदारता का पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
कहीं पार है नहीं
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