"प्रभु पलकों की कश्ती में बैठे
हम तो चले निज देश रे
प्रभु पलकों की कश्ती में बैठे
हम तो चले निज देश रे
सुख शांति की ओ दैवी दुनिया
हो......
सुख शांति की ओ देैवी दुनिया
बुलाता ओ परिवेश रे
प्रभु पलकों की कश्ती में बैठे
हम तो चले निज देश रे
प्रभु पलकों की कश्ती में बैठे
हम तो चले निज देश रे
दुनिया से हम न्यारे
हो गए बन के प्रभु के प्यारे
ले लिए ओ अपनी शरण में
दुनिया जिसको पुकारे
हो दुनिया से हम न्यारे
हो गए बन के प्रभु के प्यारे
ले लिए ओ अपनी शरण में
दुनिया जिसको पुकारे
निर्मल निच्श्वल मन को बनाना
हो .....
निर्मल निच्शल मन को बनाना
मिला यही उपदेश हे
प्रभु पलको की कश्ती में बैठे
हम तो चले निज देश रे
साथ है शिव सदा संग में
तूफा से कैसा डर
ए रूहानी राह अपनी
सुखद अपना सफर
साथ है शिव सदा संग में
तूफा से कैसा डर
ए रूहानी राह अपनी
सुखद अपना सफर
दिल नशी ओ अपनी दुनिया
ओ....
दिल नशी ओ अपनी दुनिया
मिला यही संदेश रे
प्रभु पलकों की कश्ती में बैठे
हम तो चले निज देश रे
हम फरिश्ते देव होंगे
स्वर्ग होगा हमारा
प्रेम एकता स्नेह सब में
होगा भाई चारा
हो....
हम फरिश्ते देव होंगे
स्वर्ग होगा हमारा
प्रेम एकता स्नेह सब में
होगा भाई चारा
पवित्रता को धारण कर ले
हो.....
पवित्रता को धारण कर ले
शिव का यही आदेश रे
प्रभु पलकों की कश्ती में बैठे
हम तो चले निज देश रे
सुख शांति की ओ दैवी दुनिया
हो.....
सुख शांति की ओ देैवी दुनिया
बुलाता ओ परवेश हे
प्रभु पलकों की कश्ती में बैठे
हम तो चले निज देश रे
प्रभु पलकों की कश्ती में बैठे
हम तो चले निज देश रे
प्रभु पलकों की कश्ती में बैठे
हम तो चले निज देश रे"
