इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना,
सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
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प्रभु पिता की पालना में पल रहे हैं हम सभी।
प्रभु पढ़ाई और श्रीमत मिल रही हमें अभी।
बाबा ने हमें दिए ऊंचे स्वमान है ।
इन स्वमानों को भूलें न कभी, भूलें न कभी।
स्वमान में रहते हुए देना सम्मान है।
सम्मान देने वाले को मिलता मान है।
ब्राह्मण जन्म मिला तो खुद का परिचय मिल गया।
मैं हूँ आत्मा — स्मृति को सहज ही अपना लिया।
सहज और निरंतर देही-अभिमानी रहें।
नष्टो मोहा स्मृति स्वरूप यही स्थिति अपनी रहे।
ऐसी स्थिति बन जाएगी, ऐसी स्थिति बन जाएगी तो सबको मुक्ति दिलाएगी।
दुःख और अशांति से मुक्ति दिलाएगी।
दुखियों पे करें रहम, अपना यही काम है।
सम्मान देने वाले को मिलता मान है।
हिमालय से भी बड़ी कोई समस्या हो अगर,
स्वस्थिति के आगे उसका न होगा असर।
स्वस्थिति की श्रेष्ठता का साधन है स्वमान।
इसके आगे हर समस्या का मिले समाधान।
हो कोई कमजोर तो, हो कोई कमजोर तोसम्मान देकर उठाएं हम।
गिरे हुए को गले से लगाएं हम।
कमजोर को सहयोग दे बनाना बलवान है।
सम्मान देने वाले को मिलता मान है।
प्रभु पिता की पालना में पल रहे हैं हम सभी।
प्रभु पढ़ाई और श्रीमत मिल रही हमें अभी।
बाबा ने हमें दिए ऊंचे स्वमान।
इन स्वमानों को न भूलें कभी, न भूलें कभी।
स्वमान में रहते हुए देना सम्मान है।
सम्मान देने वाले को मिलता मान है।
