

प्रभु प्रीतम की मूरत सूरत वो नुरानी थी प्रभु प्रीतम की मूरत सूरत वो नुरानी थी दादी वो प्यारी दादी सबकी जिंदगानी थी प्रभु प्रीतम की मूरत सूरत वो नुरानी थी दादी वो प्यारी दादी सबकी जिंदगानी थी प्रभु प्रीतम की मूरत दिल से करते ये वंदन श्रद्धासुमन अर्पण अपने ही सजाये थी प्रभु मिलनकी वो राते अपने ही कराये थी प्रभु से वो मुलाकाते कितनी सुखदाई वो दृष्टि वरदानी थी दादी वो प्यारी दादी सबकी जिंदगानी थी प्रभु प्रीतम की मूरत हमने न सोचा था ये दिन भी आएगा नदी सागर का संगम यूंही फिहर जाएगा प्रभु मिलन की वेला बीती कहानी थी दादी वो प्यारी दादी सबकी जिंदगानी थी प्रभु प्रीतम की मूरत दिल से करते ये वंदन श्रद्धासुमन अर्पण है अमर तेरी यादें वो प्यार की सौगातें कभी भूल न पाएंगे वो बाते मुलाकाते प्रभु प्यार जगानेवाली तेरी वाणी सुहानी थी दादी वो प्यारी दादी सबकी जिंदगानी थी प्रभु प्रीतम की मूरत सूरत वो नुरानी थी दादी वो प्यारी दादी सबकी जिंदगानी थी प्रभु प्रीतम की मूरत