

"प्रभु प्रेम के ज्ञान अमृत का पावन पान कराइए ज्ञान योग के पथ पर चलकर जीवन ज्योत जगाइए प्रभु प्रेम के ज्ञान अमृत का पावन पान कराइए ज्ञान योग के पथ पर चलकर जीवन ज्योत जगाइए प्रभु प्रेम के ज्ञान अमृत का हो.. आ... विनम्रता की आरती हो पवित्रता की धूप विनम्रता की आरती हो पवित्रता की धूप सादगी की सुंदरता से सजाले अपना रूप सादगी की सुंदरता से सजाले अपना रूप सजाले अपना रूप भले कर्म जीवन में करके हो.. भले कर्म जीवन में करके प्यार से प्रभु को रिझाइए ज्ञान योग के पथ पर चलकर जीवन जोत जगाइए प्रभु प्रेम के ज्ञान अमृत का हो.. संगम युग में सेवा करके गायन योग्य बनेंगे संगम युग में सेव करके गायन योग्य बनेंगे पुरुषार्थ कर पुरुषोत्तम बनकर पूजन योग्य बनेंगे पुरुषार्थ कर पुरुषोत्तम बनकर पूजन योग्य बनेंगे दिव्य गुणों को धारण कर हो.. दिव्य गुणों को धारण करके मन उपवन महकाइए ज्ञान योग के पथ पर चलकर जीवन ज्योत जगाइए प्रभु प्रेम के ज्ञान अमृत का हो.. आ... आओ निज परिवर्तन से जग में परिवर्तन लाए आओ निज परिवर्तन से जग में परिवर्तन लाए नवयुग जिसमें सब जग देखे वो दर्पण बन जाए नवयुग जिसमें सब जग देखे वो दर्पण बन जाए वो दर्पण बन जाए सबके गुणों के मोती लेकर हो.. सबके गुणों के मोती लेकर मुक्ता हार बनाइए ज्ञान योग के पथ पर चलकर जीवन जोत जगाइए प्रभु प्रेम के ज्ञान अमृत का पावन पान कराइए ज्ञान योग के पथ पर चलकर जीवन ज्योत जगाइए प्रभु प्रेम के ज्ञान अमृत का पावन पान कराइए ज्ञान योग के पथ पर चलकर जीवन जोत जगाइए प्रभु प्रेम के ज्ञान अमृत का हो.."