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 प्रकृति को सकाश
Spiritual Commentaries

प्रकृति को सकाश

Rupesh
Prakruti Sakash
8:30122
 प्रकृति को सकाश
Spiritual Commentaries
प्रकृति को सकाश
Rupesh
Prakruti Sakash
8:30122 plays

Transcript

अब तो शांति को हटाने स्वभाव दादा कहते हैं कि प्रकृति के चारों ओर फैले हलचल करें है लेकिन जहां में आ प्रकृतिजीत ब्राह्मणों का पांव होगा क्या हाल होगा अ कि वहां कोई भी नुक्सान हो नहीं सकता है है जहां आप प्रकृति के मालिक होंगे है वहां प्रकृति दासी बन सेवा करेगी मैं सिर्फ आप प्रकृतिजीत बच्चा अजय को के पंच तत्वों कि देश में विराजमान कि मैं प्रकृति जी देख रूपी प्रकृति है जो मेरे साथ ही है और सहयोगी कि मैं अच्छा हूं इसका आधा काट लेता है कि आदत जाऊं जो अपने स्वरूप में स्थित हो जाता है कि तीखेपन से मैम को हुआ है कि मैं परम पवित्र वो मुझसे पवित्रता के अ और मेरे प्रिय कि अ पूरे शरीर में फैल रही है कि मेरा पूरा शरीर की पवित्रता की प्रकाश से प्रकाशित हो रहा है अजय को हुआ है अजय को हुआ है कर दो अजय को में ही पवित्र रखिए नहीं को हॉस्पिटल होकर चारों ओर फैल रही कर दो MP3 कि आप इस स्थिति से मैं अपनी सुख में परिष्कृत स्वरूप से में पवित्र प्रकंपन चारों ओर फैला देते हुए कि मैं भविष्य गांव के लोगों को कि आकाश में स्थित व झाल कर दो हुआ है यह देखिए ऊपर से पवित्रता के सागर कि को पवित्र रखेंगे ने मुझ पर पड़ रही है एक बार मिक्स से होकर प्रकृति के पांचों तत्वों को जा रही है अजय को के पास उत्तर 6 यह जो आपका मित्र खो गए हैं कि तमोप्रधान कह हुआ है कि दूषित हो गए हैं हुआ है अजय को कि वे इन पवित्र के को आंख है इस पावन होते जा रहे हैं कर दो में वायु और आकाश बिल्कुल स्वच्छ दी जा रही है के द्वारा पर जितने भी नदी नाले मेरे सारे के समीप भगत प्रताप के प्रकंपन समा रहे हैं कर दो कि अग्नि तत्व भी भ���वना राशि तय हो रही है कर दो कि पूरी बहरा है की पवित्रता के प्रकाश से में प्रकाशित हो रही हैं हुआ है अजय को कि बाबासीर व्रत आखिर ने बीच में आ रही हैं 16 समाकर पांच पुस्तकों को जा रही है कि जैसे मैं प्रकृति पति कि प्रकृति का मालिक है पूरी प्रकृति से जुड़ा हुआ था कर दो हुआ है कि मेरे प्रॉब्लम पांचों तत्वों को संपूर्ण पावर कि तत्व प्रधान बना रहे हुआ है हुआ है के पति का नाम 15 दिन तक पति रूप में मेरे सामने आ गए कि मेरे पवित्र प्रथम पर कि उन्हें पालन कर रहे हैं कर दो कर दो ए वेरी मच प्रकृति पति को नमन करें आज दिल से शुक्रिया कर रहे हैं हुआ है हुआ है हूं और मैं पहला क्वेश्चन प्रयास करते हैं में पवित्र प्रकंपन चारों को फैलाते हुए ऊ के पास अपनी साकार दुख में ये सब चलता है कर दो हाउ आर यू कि हम सभी प्रकृति पति आज तक प्रकाश ने हैं जय हो ओम कर दो कर दो हुआ है

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