

प्रश्नों से पार होकर प्रसन्नचित हमे रहना है परिस्थिति के प्रभाव में कभी भी नहीं आना है प्रश्नों से पार होकर प्रसन्नचित हमे रहना है प्रसन्नचित हमे रहना है संतुष्टताके श्रृंगार से ही खुदको सजाए रखना है अप्राप्त नहीं कोई वस्तु इच्छा ना रहे कोई बाप समान सम्पन्न बने हम बाबा की है चाह यही बाबा की इस चाहना को हमको पूर्ण करना है प्रश्नों से पार होकर प्रसन्नचित हमे रहना है प्रशंसा का न हो आधार प्रसन्नता की हो सदा बहार मान शान से हो उपराम बाबा के दिल में हो शान बाबा ही है साथी सदा का अलग कभी न होना है प्रश्नों से पार होकर प्रसन्नचित हमे रहना है ज्ञानवान अनुभवी मूरत शक्तिशाली बन जाए हम निश्चयबद्धि विजई बनकर सफलता को पाए हम समय संपत्ति संकल्प का धन सफल भी करना है प्रश्नों से पार होकर प्रसन्नचित हमे रहना है परिस्थिति के प्रभाव में कभी भी नहीं आना है प्रश्नों से पार होकर प्रसन्नचित हमे रहना है प्रसन्नचित हमे रहना है संतुष्टताके श्रृंगार से ही खुदको सजाए रखना है