"ओम शांति
शिवबाबा याद है
शिव शिव बोले मन मोर कोयलिया
प्रिया भोलेनाथ जी सुना दो मुरलिया
शिव साजन ज्ञान का दरिया
री सजनी तू धोले मैली चुनरिया
शिव साजन को गीत मैं सुनाऊं उनसे रूहानी मिलन मैं मनाऊं
चोरी छुपके से तुम भी सुन लेना जी
देही अभिमानी बनके रहना जी
भोलेनाथ प्रभु तुम प्राणों से प्यारे
हम बने वही फिर आशिक तुम्हारे
बच जाओगे माया के तूफान से
छूट जाओगे जीवन की जंजाल से
आओ करलो शादी तुम भगवान से
मैने जाके गगन में ढूंढा
ब्रम्हा बाबा से मैने पूछा
बाबा भोले बताओ तुम कहा रहते हो
ये राज अपने बच्चों से कहना है
सेवाधारियों के संग मुझे रहना है
इन रचानोंओ को सुनकर
राजयोग में बैठकर चिंतन करे सुमीरन करे
और अपने प्यारे परमात्मा शिव को आबू में आकर मिले
ओम शान्ति"
