हम गॉडली स्टूडेंट हैं। प्रवृत्ति में रहते हुए भी उसके आकर्षणों से परे रहना है। हम ट्रस्टी हैं और हमारे सर्व संबंध एक बाबा से होने चाहिए। श्रीमत पर चलते हुए बाबा से सच्चा प्यार रखें, निश्चयबुद्धि बनें और मायाजीत बनें।
अमृतवेले बाबा से रूह-रिहान करना है और अपनी स्थिति को फरिश्ता स्वरूप बनाना है। नि:अहंकारी, निरंकारी और निर्विकारी बनकर देह-अभिमान का त्याग करना है।
कर्म तो करने ही हैं, लेकिन कर्म करते हुए मन-बुद्धि बाबा की याद में रहे। प्रवृत्ति में वृत्ति नहीं लगानी, बल्कि बाबा की याद में योगयुक्त कर्म करना है। कमल फूल समान रहते हुए सहज योगी और अंतर्मुखी बनना है।
प्रवृत्ति में रहते हुए ममता नहीं, मोह नहीं; सबके प्रति प्यार और शुभकामनाएँ रखनी हैं। परिवार की जिम्मेदारियों को बोझ नहीं समझना है। सेवा करते हुए निमित्त भाव रखना है, अहंकार नहीं।
अपनी स्थिति को अचल-अडोल रखने के लिए तीन बिंदु याद रखें—बाबा बिंदु, आत्मा बिंदु और ड्रामा बिंदु।
प्रवृत्ति में रहते हुए बाबा की याद में रहना ही सच्ची निवृत्ति है।
