पुरुषार्थ में अटेंशन कैसे रखें: दादी गुलज़ार के कमल मुख से
मन के मौन से अंतर्मुखी हो जाते हैं, जिससे अनुभवों का खजाना मिलता है।
मौन की भट्टी से बाबा के लगन की अग्नि निकलती है। इस लगन की अग्नि में हमारी कमी–कमजोरी जल जाती है। 63 जन्मों के संस्कारों को समाप्त तो करना ही है — चाहे योग से या भोग से। भट्टी का अर्थ ही है लगन में मग्न होना — एक बाबा, दूसरा न कोई।
