

पुरुषार्थ में अटेंशन कैसे रखें: दादी गुलज़ार के कमल मुख से मन के मौन से अंतर्मुखी हो जाते हैं, जिससे अनुभवों का खजाना मिलता है। मौन की भट्टी से बाबा के लगन की अग्नि निकलती है। इस लगन की अग्नि में हमारी कमी–कमजोरी जल जाती है। 63 जन्मों के संस्कारों को समाप्त तो करना ही है — चाहे योग से या भोग से। भट्टी का अर्थ ही है लगन में मग्न होना — एक बाबा, दूसरा न कोई। बाबा को जो भी सुनाओ, वह बाबा के दिल में ही रहता है। आपने बाबा से मिलन मनाया होगा, दिल की बातें की होंगी। दिलाराम बाप से बातें की होंगी। बाबा ने आपको शक्तियों की भेंट दी होगी, प्यार के झूले में, खुशी के झूले में झुलाया होगा। ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के बाद, फरिश्ते रूप में कितना सेवा का विस्तार हुआ है। विदेशों में भी तब सेवा शुरू हुई। साकार शरीर की सीमा होती है, लेकिन फरिश्ते को कोई सीमा नहीं। इसलिए अव्यक्त रूप से सूक्ष्म वतन में जाओ, बैठो, बातें करो — तो आपको महसूस होगा कि बाबा व्यक्तिगत रूप से आपसे ही बातें कर रहे हैं। अब तो बाबा ने सेवा के बहुत सहज साधन बताए हैं — मनसा सेवा का साधन दिया है कि मृत्यु तक कोई भी सेवा कर सकता है। कोई भी उलहाना नहीं दे सकता कि हम देर से आए हैं, बहुत बीमार हैं, या बहुत बंधन में हैं। “लास्ट सो फर्स्ट” आ सकते हो। इसलिए मेहनत तो करनी ही पड़ेगी। संकल्प की शक्ति पर बाबा समझाते हैं कि हम जो भी बोलें या कर्म करें, वह सब पहले संकल्प से शुरू होता है। जैसे संकल्प, वैसे बोल; जैसी वृत्ति, वैसी दृष्टि, वैसी कृति (कर्म)। इसलिए बाबा ने संकल्प शक्ति पर बहुत ज़ोर दिया है। ये साधन सेवा के लिए ही निकले हैं, संदेश पहुँचाने के लिए ही बने हैं। साधन का सदुपयोग करना है, साधन के वश में नहीं होना है। कार्य के अर्थ उपयोग करो, फिर न्यारे हो जाओ। जब मन-बुद्धि की लाइन क्लियर होगी, तो आपको साफ सुनाई देगा — जैसे कोई कुछ कह रहा हो, बिल्कुल वैसे ही जैसे फोन में साफ सुनाई देता है। संकल्प शक्ति से मनसा सेवा कर सकते हो, और अंत में संकल्प ही “पास विद ऑनर” होने में मदद करेगा। संकल्प शक्ति हमारा सबसे बड़ा खजाना है। संकल्प शक्ति से आप अपना भविष्य जैसा चाहें वैसा बना सकते हैं। संकल्प शक्ति पर नियंत्रण है तो सभी शक्तियों पर नियंत्रण है। जैसे धन जमा करने पर ब्याज की खुशी होती है, वैसे ही यदि संकल्प शक्ति पर नियंत्रण है तो अपार पूँजी जमा होगी। मन का मौन होना आवश्यक है। चार्ट लिखना है — कोई बहाना नहीं देना है। सोने के समय चार्ट चेक करो। यदि अटेंशन होगा तो चार्ट अवश्य देखोगे। एक घंटे का ही चेक करो तो पता चलेगा कि कितना फालतू सोचते हैं। बुद्धि क्लीन और क्लियर होगी तो बाबा के संकल्प हमें टच करेंगे। अंत समय पेपर होगा — तब बाबा मदद नहीं देंगे। जो अभी हम कमाई करेंगे, वही सतयुग में काम आएगी। सबको लक्ष्मी-नारायण बनना है, तो उतनी कमाई भी चाहिए। मास्टर सर्वशक्तिवान बच्चे का शिक्षक स्वयं सर्वशक्तिमान बाबा है। समय आएगा जब सर्वशक्तिमान बाबा हमारा टीचर बनेगा। इसलिए समय से पहले हमें संपूर्ण बनना है। बाबा ने शिक्षा दी है — एवर रेडी का पाठ पढ़ाया है। एक घंटा देही-अभिमानी बनो और देखो, कितने विघ्न आते हैं। अंत समय में यह कार्य नहीं होगा। अलबेलापन स्थिति में स्थित नहीं होने देगा। इसलिए — अटेंशन प्लीज़!