

प्यारी मम्मा की बैंगलोर के बाबा के बच्चों के साथ रूह रुहान 1. बाबा और मम्मा सबकी डबल संभाल करते है - रूहानी और जिस्मानी। खिलाना पिलाना, बीमारी में दवाई.. जैसे जिस्मानी सेवा करते, रूह की responsibility भी है; दोनों सेवा साथ-साथ करनी है l हम भी जैसे प्रवृत्ति में रहते है; बाबा और मम्मा को कितने बच्चे है। लेकिन आप लोगों को तो सिंगल सेवा है - सिर्फ जिस्मानी। फिर भी बहाना बनाते है। बाबा मम्मा ने कभी कोई बहाना नहीं दिया। 2. पाकिस्तान, कराची में सब अपना काम अपने हाथ से करते थे। कपड़े धोना, चप्पल बनाना सब अपने हाथ से करना होता था। 3. सब बातें प्रैक्टिकल जीवन बनाने की है। बेहद का बाप कैसे बाप टीचर सद्गुरु, प्रैक्टिकल बनकर पालन देते है। 4. कौन ज्ञान सुना रहा है? एक बापl कौन खिला रहा है? एक बापl कौन डायरेक्शन दे रहा है? एक बापl भले मम्मा सुना रही है परंतु नॉलेज तो उसकी हैl तो बुद्धि में एक बाप की ही याद रहेगी। 5. ब्राह्मणों का रिलेशन डायरेक्ट बाप से है इसलिए ब्राह्मण देवता से भी ऊंचे है। 6. जो pure और योगी होंगे उन्हों को (मधुबन में) आनंद आएगा नहीं तो (ज्ञान) उल्टा उठाते रहेंगे। जो पवित्रता की धरण में रहेंगे, योगी रहेंगे, तो आनंद आएगा। वह ईश्वरीय सुख की भासना भी आएगी। 7. एक दो के अनुभव सुनने से अच्छी बातें मिलती है - जैसे की इतना छोटा अगर पवित्र रह सकता है तो हम क्यों नहीं रह सकते