

रात भर को बैठना अब कहानी हो गयी रात भर को बैठना अब कहानी हो गयी मीठी दादी बाप दादा मीठी दादी बाप दादा की निशानी हो गई यज्ञ सेवा करते करते आसमानी हो गई आसमानी हो गई साकार करते थे कभी उस प्यार के सागर को जो जो भी जाते थे लभा लभ भरते थे गागर को ओ अपने घर वतन को जाने अपने घर वतन को जाने को दीवानी हो गई को दीवानी हो गई यज्ञ सेवा करते करते आसमानी हो गई आसमानी हो गई मर्ज होती थी स्वयं इमर्ज बाबा करती थी खुद को पीछे रख खुदा को खुद से आगे करती थी त्याग का भी त्याग करके त्याग का भी त्याग करके तरसे खुद ही सो गई तरसे खुद ही सो गई यज्ञ सेवा करते करते आसमानी हो गई आसमानी हो गई देखा सबने उनके जीवन की बहुत उदारता खुद छिपी रहती खुदा उनसे ही था निहारता आत्माएं खुद खुदा से सबकी सब मिलाई है अपनी भी कोई है इच्छा कभी नही बताई है मीठी दादी बाप दादा मीठी दादी बाप दादा की निशानी हो गई यज्ञ सेवा करते करते आसमानी हो गई यज्ञ सेवा करते करते आसमानी हो गई आसमानी हो गई आसमानी हो गई