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"राजयोगिनी दादी की याद में है ये वंदन शिव यज्ञ की सेवा में मानो अर्पित हुआ ये चंदन ईश्वरीय विद्यालय ही कर्म भूमि थी उनकी यही लक्ष्य था जीवन का मैं करूंगी सेवा सबकी ईश्वरीय विद्यालय ही कर्म भूमि थी उनकी यही लक्ष्य था जीवन का मैं करूंगी सेवा सबकी दिए वचन का किया उन्होंने अंतिम क्षण तक पालन शिव यज्ञ की सेवा में मानो अर्पित हुआ ये चंदन राजयोगिनी दादी की याद में है ये वंदन शिव यज्ञ की सेवा में मानो अर्पित हुआ ये चंदन सेवा भावी सत्यवादिनी ममता की थी मूर्ति शिव ज्ञान अमृत पिलाके सबको की सेवा की पूर्ति सेवा भावी सत्यवादिनी ममता की थी मूर्ति शिव ज्ञान अमृत पिलाके सबको की सेवा की पूर्ति यूनो में भी शांति दूत कह किया उन्हें अभिवादन शिव यज्ञ की सेवा में मानो अर्पित हुआ ये चंदन राजयोगिनी दादी की याद में है ये वंदन शिव यज्ञ की सेवा में मानो अर्पित हुआ ये चंदन स्वमान में रही और अन्त में शिव बाबा की गोद ली हम बच्चो की अर्पित है भावभीनी श्रद्धांजलि स्वमान में रही और अन्त में शिव बाबा की गोद ली हम बच्चो की अर्पित है भावभीनी श्रद्धांजलि त्याग तपस्या से बना था नष्टोमोहा जीवन शिव यज्ञ की सेवा में मानो अर्पित हुआ ये चंदन राजयोगिनी दादी की याद में है ये वंदन शिव यज्ञ की सेवा में मानो अर्पित हुआ ये चंदन ____________________________"