

लोग तीर्थों पर दर्शन करने जाते हैं, लेकिन जो सदा प्रसन्न रहते हैं वही दर्शनीय मूर्त हैं। जो स्वयं से खुश और सबसे खुश रहते हैं, उनसे बाबा भी खुश रहते हैं। सच्ची आत्मा की अवस्था मज़बूत और अचल होती है। राजयोगी वह जो रियलिटी और रॉयल्टी में रहता है — कर्म में सच्चाई और श्रेष्ठता हो। योग से वायुमंडल पवित्र बनता है। ज्ञान हमारी खुराक भी है और श्रृंगार भी। जितना मंथन करेंगे, उतना ज्ञान-अमृत निकलेगा। बाबा को ज्ञानी तू आत्माएँ प्रिय हैं। योगी वह जो स्नेही और सहयोगी हो, सदा श्रीमत पर चलता हो। सच्चा योगी अंदर-बाहर से साफ होता है। जिसकी पढ़ाई में लगन है, उसी पर बृहस्पति की दशा है। “मैं” और “मेरे” के त्याग बिना, वर्से का अधिकारी नहीं बन सकते। सच्चा समर्पण मतलब संपूर्ण स्वाहा — बुद्धि से स्वाहा। बिना स्वाहा किए सफलता नहीं मिलती। बाबा कहते हैं — रीस नहीं, रेस करनी है, अभी उड़ने का समय है। याद इतनी शक्तिशाली हो कि सेकंड में वतन पहुँच जाएँ। ऐसी रिहर्सल होगी तो ही उड़ सकेंगे। सभी के लिए शुभ भावना रखो। नंबर वन आत्मा कभी नहीं थकती। थकान से निराशा और व्यर्थ संकल्प आते हैं। एक बात पक्की करो — सी फॉदर, फॉलो फॉदर। मधुबन निवासी वह, जिसके मन में बाबा, मुरली और मधुबन हो। तपस्या में — एक बाबा दूसरा न कोई, और सेवा में निष्काम भाव। त्याग और तपस्या बिना सेवा करने वाला बेबी समान है, बाबा समान नहीं।