"सागर की जितनी गहराई, अम्बर की जितनी ऊंचाई
सूरज में जितनी रोशनी, चन्दा में जितनी रोशनी
प्रभु-प्यार तुम्हारा ऐसा है, दिल से आवाज आयी
खुशी प्रेम के दीप जले, जीवन में तेरे सहारे
प्रभु सुमन बन महक उठे, देखे तेरे नजारे
जैसे फूल मुस्कराते हैं, ज्यूँ इन्द्रधनुष रंग लाते हैं
प्रभु-प्यार तुम्हारा ऐसा है, दिल से आवाज आयी
नाज है हमें इस जीवन पर प्यार तुम्हारा पाकर
भूल गये हैं दुनिया हद की, तेरी दुनिया में आकर
तकदीर जो ऐसी बनाई, जन्मों की ज्योति जगाई
प्रभु-प्यार तुम्हारा ऐसा है, दिल से आवाज़ आयी"
