झुक झुक झुक,
चली संगम की रेल,
वाह वाह वाह,
चला ड्रामा का खेल।
छुक छुक छुक – ट्रेन रवाना
टन टन टन – स्टेशन में घंटी
चलो चलो चलो,
हैं ये संगम एक्सप्रेस,
पहनो पहनो पहनो,
हैं ये फ़रिश्ता ड्रेस।
चम चम चम – फरिश्ता ड्रेस की चमक
ज्ञान की सूटकेस,
योग की सीट,
प्योरिटी की बर्थ,
खुशी का टिफ़िन,
गुणों की गॉगल,
मौज की कैप,
सेवा का मैप,
श्रीमत की पटरी,
और सत्य का इंजन...
वाया वाया जाते,
वाया सूक्ष्म वतन,
वाया मूल वतन,
पहुचेंगे सतयुग हम...
क्लिक क्लिक क्लिक – सच्चाई का टिकट
झन झन झन – मुरली की टनकार
बच्चे बोले — “चलना है कब ?”
टी.टी. ब्रह्मा बाबा बोले — "तैयार हो सब?"
ट्रेन का ड्राइवर – शिव बाबा बना ‘ज्ञान प्रभाकर'
चम चम चमके - बच्चें बने डिवाइन पैसेन्जर।
पिट पिट पिट – टाइमटेबल की घड़ी
ठक ठक ठक – बाबा का इशारा
पू…पू…पू…
बजा समय का हॉर्न,
हर स्टेशन पर – बजता अलार्म।
“काम नगर” आया – ना उतरना भाई,
ये स्टेशन बहुत घुमा दे भाई!
“क्रोधपुरी” आई – आग सी जलाए,
मन की ट्रेन को भटका जाए।
“लोभ गाँव” आया – मीठा लगे जाल,
लेकिन वहाँ छुपा है दुःखों का माल।
“मोह नगरी” – रिश्तों का फंदा,
फँसाना- यही तो माया का धंदा।
“अहंकार सिटी" – में है बहुत ऊँचा टॉवर,
गिरा दे नीचे – खो जाए पावर!
धक धक धक – मन की धड़कन
खड़खड़ खड़खड़ – धारणा हिलना
बूम बूम बूम – जब आत्मा करे रावण वध
पढ़ाई में बहुत मन लगाना,
योग में रुचि बढ़ाना,
दिव्य गुणों को धारण करना,
सेवा में समय सफल करना।
रहना बिजी, सब्जेक्ट है चार,
बाबा के बच्चे – सबसे शानदार!
टप टप टप – सेवा की वर्षा
झप झप झप – संकल्प उड़ते जाएँ
लो आ गया “परमधाम स्टेशन”,
जहाँ न धूप न कोई टेंशन।
शांति ही शांति,
लाइट ही लाइट,
बिंदु स्वरूप – सब दिखें ब्राइट।
फिर आयी– सतयुगी दुनिया,
जहाँ सब लगे नया ही नया,
ना रोग, ना शोक, ना दुख की छाया,
हर आत्मा बने देव, ना कोई माया।
श्श्श... शांति शांति शांति – परमधाम में प्रवेश
अब रोज़ चलाओ – संगम की रेल,
हर बच्चा बने – "योगी एक्सप्रेस मेल!"
बाबा का संग,
हर जन्म में रंग,
बच्चों के दिल में बजे –
सतयुगी तरंग,
मुरली की उमंग!
झुक झुक झुक,
चली संगम की रेल,
वाह वाह वाह,
चला ड्रामा का खेल!
