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सांझ हो गई सृष्टि चक्र की सांझ हो गई सृष्टि चक्र की चल रे राही अपने धाम तेरी मंजिल परमधाम है तेरी मंजिल परमधाम है वहा मिलेगा तुझे आराम सांझ हो गई सृष्टि चक्र की सांझ हो गई सृष्टि चक्र की भूले भटके वो मुसाफिर रुक मत जाना अब तो कहीं जन्म जन्म का फेरा लगाया जन्म जन्म का फेरा लगाया चैन सुख ना पाया कहीं आये फिर से बाबा अपने आये फिर से बाबा अपने बना रहे है सबको महान सांझ हो गई सृष्टि चक्र की सांझ हो गई सृष्टि चक्र की हर तूफान देता है तोहफा मुश्किलों से मत घबराना पुण्य कर्म के मन चमन से पुण्य कर्म के मन चमन से सारे जग को महकाना राहो में जो भी आए राहो में जो भी आए देता चल तू प्रभु पैग़ाम सांझ हो गई सृष्टि चक्र की सांझ हो गई सृष्टि चक्र की बहती जाती समय की धारा किसके लिए भी रुकती नहीं चलता चल तू बढ़ता चल चलता चल तू बढ़ता चल हर दिशा कहती यही सब की प्रीत प्रभूसे लगा दे करता चल तू ये शुभ काम सांझ हो गई सृष्टि चक्र की सांझ हो गई सृष्टि चक्र की सांझ हो गई सृष्टि चक्र की —-------------------------------------------