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Homeसंस्कारों के सूक्ष्म बीज का परिवर्तन कैसे करें
संस्कारों के सूक्ष्म बीज का परिवर्तन कैसे करें
Spiritual Classes

संस्कारों के सूक्ष्म बीज का परिवर्तन कैसे करें

Dadi Gulzar Ji
46:26174
संस्कारों के सूक्ष्म बीज का परिवर्तन कैसे करें
Spiritual Classes
संस्कारों के सूक्ष्म बीज का परिवर्तन कैसे करें
Dadi Gulzar Ji
46:26174 plays

Essence

हमें बाप समान बनना ही है — यह हमारा बाबा से किया हुआ वादा है। सिर्फ सोचना या देखना नहीं, करना है, क्योंकि बाबा का साथ और श्रीमत का हाथ हमारे साथ है। अमृतवेले से रात तक हर कर्म श्रीमत के आधार पर करना है और बाबा की याद में ही दिन बिताकर याद की गोदी में सो जाना है।

बाबा ने याद के लिए ट्रैफिक कंट्रोल दिया है। जैसे हम दिन में कई बार भोजन करते हैं, वैसे ही हर बार बाबा की याद में रुकना है। इससे व्यर्थ संकल्पों पर लाल बत्ती लग जाती है। कहावत भी है — “जितना कायदा, उतना फायदा।”

अगर कोई कहता है कि बाबा की याद मुश्किल है, तो सोचना चाहिए — प्यारी चीज कभी भूलती है क्या? बाबा का प्यार सागर से गहरा और आकाश से ऊंचा है। जब हम प्राप्तियों और प्रेम का मनन करते हैं, तो बाबा की याद सहज हो जाती है।

योग यानी याद। याद सहज तभी होती है जब हम ज्ञान का मनन करते हैं। बाबा ने हमें ज्ञान-तलवार दी है माया को जीतने के लिए। जैसे गाय खाना खाकर बार-बार उगारती है, वैसे ही हमें ज्ञान का मनन करना है। तभी विधि से सिद्धि मिलती है।

हमारे संकल्प बहुत शक्तिशाली हैं। पहले संकल्प, फिर वचन और फिर कर्म बनते हैं। इसलिए संकल्प को ही चेक एंड चेंज करो — मेहनत कम हो जाएगी।
अगर कोई विघ्न देता है, तो समझो यह हमारा पेपर है।

हम ऊंची पढ़ाई पढ़ रहे हैं, इसलिए पेपर भी आएगा। संकल्प रखो — “दूसरों को दुख नहीं देना है और मुझे दुख नहीं लेना है।” स्व-परिवर्तन से ही विश्व-परिवर्तन होगा। हमें खुद को बदलना है, दूसरों को नहीं देखना है।

संस्कारों का बीज है देह भान, देह-अभिमान और लगाव। इसका समाधान है — बार-बार स्मृति लाओ: “मैं आत्मा हूँ, कर्मेंद्रियों की मालिक हूँ।” जब आत्मा-भान मजबूत होता है, तो संस्कारों के बीज समाप्त हो जाते हैं और परिस्थिति आने पर भी कोई नकारात्मक संस्कार इमर्ज नहीं होता।

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