

संतुष्टमणि आत्माएं हम दिव्य गुणों की संपत्ति से धनवान है शक्तिशाली आत्माएं हम आत्मिक बल से सदा ही हम बलवान है संतुष्टमणि आत्माएं हम ज्ञान रत्नों की संपत्ति से धनवान है शक्तिशाली आत्माएं हम आत्मिक बल से सदा ही हम बलवान है सर्व संबंधों से परमात्मा ही स्वयं हम पे सदा कुर्बान है संतुष्टमणि आत्माएं हम दिव्य गुणों की संपत्ति से धनवान है संतुष्टता अपना स्वरूप है सर्व प्राप्तियों से भरपूर है सर्व के प्यारे बन गए है प्रभु नैनो के हम नूर है अपनी शान में स्व की स्वमान में इस जहा से हम सदा ही उपराम है संतुष्टमणि आत्माएं हम ज्ञान रत्नों की संपत्ति से धनवान है शक्तिशाली आत्माएं हम आत्मिक बल से सदा ही हम बलवान है बाबा से वरदान जो मिले है उसको जीवन में उतारे हम परिस्थिति भी मनोरंजन बनी है हलचल में भी ना हारे हम प्यारे बाबा की अशाओको पूरा करे बाबा जैसा हम बने ये अरमान है संतुष्टमणि आत्माएं हम दिव्य गुणों की संपत्ति से धनवान है आत्मिक बल से सदा ही हम बलवान है