"सर्व व्यापी नहीं भगवान तुम्हें भटकाए माया शैतान
सर्व व्यापी नहीं भगवान तुम्हें भटकाए माया शैतान
एक पल में वो आ जाते है द्रौपदियों की लाज बचाते है
मीरा ने विष का प्याला पिया मीरा को जीवन दान दिया
ये बातें समझो श्रीमान तुम्हे भटका रहा शैतान
सर्व व्यापी नहीं भगवान तुम्हें भटकाए माया शैतान
सर्व व्यापी नहीं भगवान तुम्हें भटकाए माया शैतान
ओम ध्वनिआबू में लगाई है पिया मिलन को पधारों बधाई है
ज्ञानामृत मधुबन में बरसाया है
सोलह कलाओं से कृष्ण सजाया है
सुख शांति लूटा रहे है वो
सुख शांति लूटा रहे है वो
दे रहें है वरदान तुम्हें भटका रहा शैतान
सर्व व्यापी नहीं भगवान तुम्हें भटकाए माया शैतान
सर्व व्यापी नहीं भगवान तुम्हें भटकाए माया शैतान
मंदिर मस्जिद गिरिजा गुरुद्वारे
भटक रहें दुकानों में बेचारे
मदिरा पीते कहीं भांग चढ़ाते है
मासूमों की यह बाली चढ़ाते है
तन मन धन गवा बैठे है
तन मन धन गवा बैठे है
नासमझ नादान तुम्हें भटका रहा शैतान
सर्व व्यापी नहीं भगवान तुम्हें भटकाए माया शैतान
सर्व व्यापी नहीं भगवान तुम्हें भटकाए माया शैतान"
