“इस वर्ष को विशेष जीवनमुक्त वर्ष के रूप में मनाओ,
एकता और एकाग्रता से बाप की प्रत्यक्षता करो''
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सर्व खजानों के मालिक बाबा के, बालक सो मालिक हम बन गए।
परमात्मा प्यार के पात्र हम, सर्व खजाने अपने हुए।
अखूट, अखंड, सर्व खजाने मिल गए, जन्म-जन्मांतर ये साथ चल दिए।
खाली हाथ आए, पर खाली हाथ न जाएं, अविनाशी खजाने साथ ले जाएं।
अखूट, अखंड, सर्व खजाने मिल गए, जन्म-जन्मांतर ये साथ चल दिए।
ज्ञान-धन से हमें समझदार बनना, त्रिकालदर्शी बनकर हर कर्म करना।
विधि से सिद्धि दिलाए, बंधनों से मुक्ति, जीवन मुक्त बनाए ज्ञान का खजाना।
बंधनमुक्त होकर सबको भी बनाएँ, दुःख-अशांति से उन्हें मुक्त हम कराएँ।
अखूट, अखंड, सर्व खजाने मिल गए, जन्म-जन्मांतर ये साथ चल दिए।
स्वयं परिवर्तन से सर्व को बदलें, संसार से पहले यह परिवार बदलें।
ओटे से अर्जुन बनकर आगे हैं बढ़ना, ब्रह्मा बाप समान हमें है बनना।
सर्व संबंधों में एकता को लाएँ, श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता हो जाए।
अखूट, अखंड, सर्व खजाने मिल गए, जन्म-जन्मांतर ये साथ चल दिए।
सर्व खजानों के मालिक बाबा के, बालक सो मालिक हम बन गए।
परमात्मा प्यार के पात्र हम, सर्व खजाने अपने हुए।
