"सतयुगी आदि काल अंत समय का
पुरुषोत्तम संगम है दो दिलों का
सतयुगी आदि काल अंत समय का
पुरुषोत्तम संगम है दो दिलों का
भगवान शिव के आनेसे खुश होती है धरती
भगवान शिव के आनेसे खुश होती है धरती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
शिव बाबा ब्रह्मा के तन में आते है
आ करके सहज राजयोग सिखाते है, सभी दुनियां परिवर्तित होती है
प्रजापिता ब्रह्मा तन में है आते
आत्मा को सहज राजयोग सिखाते
प्रजापिता ब्रह्मा तन में है आते
आत्मा को सहज राजयोग सिखाते
सतयुग में दुनियां परिवर्तित होती
सतयुग में दुनियां परिवर्तित होती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
आत्माये सभी होती है फूल से कांटे
काटों से खुशबूदार फूल शिव ही बनाते
ज्योत जगाते शिव सत्य ज्ञान की
रूहों में जगाते शिव सत्य ज्ञान की ज्योति
रूहों में जगाते शिव सत्य ज्ञान की ज्योति
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
आत्म ज्योत जागते ही खुलती है आंखे
ऐसी विशेष आत्मा दैवी भाग्य को पाती
ऐसी विशेषआत्मा दैवी भाग्य को पाती
आत्म ज्योत जागते ही खुलती है आंखे
फिर वो आत्म स्वरूप सभी को देंखे
आत्म ज्योत जागते ही खुलती है आंखे
फिर वो आत्म स्वरूप सभी को देंखे
ऐसी विशेष आत्मा दैवी भाग्य को पाती
ऐसी विशेषआत्मा दैवी भाग्य को पाती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
सतयुगी आदि काल अंत समय का
पुरुषोत्तम संगम है दो दिलों का
सतयुगी आदि काल अंत समय का
पुरुषोत्तम संगम है दो दिलों का
भगवान शिव के आनेसे खुश होती है धरती
भगवान शिव के आनेसे खुश होती है धरती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती
प्यार से मनाते सभी शिव की जयंती"
