शिव शक्ति तू,
शिव प्रिया तू,
शिव चेतना तू,
शिव अर्धांग तू।
पीड़ित और सिसकते मन पर
अपनी करुणामयी वर्षा दे।
जन्मों से भक्त ढूंढ रहे हैं,
अब उनमें नवचेतना भर दे।
शिव शक्ति तू,
शिव प्रिया तू,
शिव चेतना तू,
शिव अर्धांग तू।
हे ब्रह्मचारिणी, तपस्विनी,
हे जगत माता, शिव शक्ति,
हे ममतामयी, सरस्वती,
हे करुणामयी, भगवती।
मूर्छित मन के सूखे वन में
पनी करुणा-सरिता बहा दे।
जन्मों से भक्त ढूंढ रहे हैं,
अब उनमें नवचेतना भर दे।
शिव शक्ति तू,
शिव प्रिया तू,
शिव चेतना तू,
शिव अर्धांग तू।
हे दुर्गा, हे भवानी,
हे महातप, हे चामुंडा,
हे निशुंभ-शुंभ हननि,
हे महिषासुर-मर्दिनी,
हे चण्ड-मुण्ड-विनाशिनी,
हे असुरसंहारिणी।
वीरान हो गए हृदय-उपवन में
रंग-बिरंगे पुष्प खिला दे।
जन्मों से भक्त ढूंढ रहे हैं,
अब उनमें नवचेतना भर दे।
शिव शक्ति तू,
शिव प्रिया तू,
शिव चेतना तू,
शिव अर्धांग तू।
हे ज्ञान-परी, हे पार्वती,
हे देवमाता, हे वैष्णवी,
हे भद्रकाली, हे कालरात्रि,
हे अग्निज्वाला, हे रौद्रमुखी।
व्याकुल नैनों की सूखी धरती पर
खुशी की शहनाई बजा दे।
जन्मों से भक्त ढूंढ रहे हैं,
अब उनमें नवचेतना भर दे।
शिव शक्ति तू,
शिव प्रिया तू,
शिव चेतना तू,
शिव अर्धांग तू।
