"शमा लेके ढूंढे जिसे जहां सारा
वहीं तु खुदा है बाबा हमारा बाबा हमारा
नशा है हमें हम है बच्चें तियारे
तु मम्मा हमारी सखा भी तु न्यारा
नशा है हमें तु पढ़ाता हमे है
कहता हम ही से वही जो है करना
नशा है मुझे तु दिलाता है साकी शराब ए हकी की रूहानी प्याला
बना तु रहा है हमें शा हजादा
नशा है रूहानी नहीं मैं प्यादा
नशा है तेरे बल पर बेफिकर मैं
बना हु रियासतका सुल्तान प्यारा
रियासत हमारी जिसम ये समूचा
है सुल्तान हम सल्तनत ये हमारी
हमें ही बनाता तु जरिया ये जन्नत
फरिश्ता हुलादि जहा का सितारा
शमा लेके ढूंढे जिसे जहां सारा
नहीं अब हदों के गुलामी नजारे
वतन आफताबी में आजाद सारे
तेरी बूंद को जो तरसते रहे थे
पिलाया हमें इश्क में दरिया ही सारा
तेरी गोद का भी नशा है अनोखा
तेरा दिल मकान है जन्नत झरोखा
है दिलतख्त तेरा नशी हम है तू है
सभी ताकदे अब है हमारी शरारा
शमा लेके ढूंढे जिसे जहां सारा
हमारे तुम ही हो हम ही है तुम्हारे
ये सारी दिशाएं बजाती नजारे
खुदा दोस्त बाबा मम्मा तु आशिक
माशूका नशे मन है तू ही हमारा
तेरी शायरी है तेरी ही बदौलत
तेरी खतिरी के नशें में रहे हम
अधिक है ना सरपर कही बोझ कोई
कलंधर बनाया है गुलिस्तान प्यारा
शमा लेके ढूंढे जिसे जहां सारा
खुदा तू ही शायर है मेरी शायरी का
तु जब भी खत लिखता हमें आशिकी के
जहां की मिली बादशाही हम ही को
मिला सब दुवाओं का खजाना तुम्हारा
जहर ही भरा था खुद ही वासना का
जहर की लहर में फंसे थे परिंदे
तू पैगाम लाया रूहानी शमा का
तभी से बना हुं फरिश्ता पिया का
शमा लेके ढूंढे जिसे जहां सारा
वहीं तु खुदा है बाबा हमारा बाबा
हमारा बाबा हमारा बाबा हमारा
