आत्मा को देख बात करना है,
आत्मा से आत्मा बात कर रहा है।
आत्मा देख रहा है।
तो वृत्ति सदा ही शुभ रहेगी।
(Avyakt Bapdada 07.03.2005)
देह के भव्य भाल
पर विराजमान,
पवित्र एक ज्योति
सीप में जैसे एक अनमोल मोती
मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...
मैं आत्मा हूँ
अक्षय और अविनाशी
मैं आत्मा हूँ
सत्य स्वरूप, मैं आनंद स्वरूप
अमर हो
अजर हो
शांत हो
प्रशांत हो
आनंद हो
निर्द्वंद हो
सत्य हो
नित्य हो
अनन्त हो
बेअंत हो
अखंड हो
प्रचंड हो
शुद्ध हो
बुद्ध हो
मुक्त हो
युक्त हो
सिद्धि हो
शुद्धि हो
स्फूर्ति हो
अनुभूति हो
बिंदु हो
सिंधु हो
रिति हो
नीति हो
शाश्वत, दिव्य प्रेरणा
मैं एक आत्मा हूँ,
सत्य का उजियारा
विश्व का हूँ मैं सहारा ।
मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ....
मैं आत्मा हूँ
सदा विजयी, सदा वरदानी
मैं आत्मा हूँ
ज्ञान स्वरूप, मैं शक्ति स्वरूप
आधार हो
निराधार हो
प्रखर हो
मुखर हो
स्थिर हो
प्रवीर हो
धीर हो
गंभीर हो
अजेय हो
विजय हो
अभेद्य हो
नैवेद्य हो
अखिल हो
निखिल हो
देव हो
सदैव हो
सजग हो
सचेत हो
संयम हो
नियम हो
कमल हो
निर्मल हो
निडर हो
निर्वैर हो
चेतना हूँ निराकार
मैं एक अमृत धार,
प्रेम का संगम,
दिव्यता का हूँ एक मधुर सरगम
मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...
मैं आत्मा हूँ
सदा पवित्र, सदा शांत
मैं आत्मा हूँ
सुख स्वरूप, मैं प्रेम स्वरूप
सरल हो
अचल हो
मित्र हो
पवित्र हो
शुभ हो
मंगल हो
दिव्य हो
भव्य हो
तेज हो
ओज हो
उज्जवल हो
सबल हो
अडोल हो
अनमोल हो
त्याग हो
विराग हो
कांति हो
दीप्ति हो
गीत हो
संगीत हो
अनहद एक पुकार
शक्ति मुझमे अपार,
ज्ञान का गुंजन,
पवित्रता का हूँ प्यारा मधुबन
मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...
मैं आत्मा हूँ
सदा दानी, सदा महादानी
मैं आत्मा हूँ
फ़रिश्ता स्वरूप, मैं देव स्वरूप
प्राण हो
आव्हान हो
दीप हो
द्वीप हो
सकाश हो
प्रकाश हो
दृश्य हो
अदृश्य हो
व्यक्त हो
अव्यक्त हो
अद्भुत हो
अद्वैत हो
शब्द हो
निःशब्द हो
पावन हो
सुमन हो
प्रेम हो
श्वास हो
शक्ति हो
युक्ति हो
अंतर्मन का प्रकाश
मैं हूँ शुभ विश्वास,
आनंद का सुमन,
जीवन का हूँ अखंड समर्पण
मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...
मैं आत्मा हूँ
सदा ताज, तख़्त, तिलक धारी
मैं आत्मा हूँ
स्मृति स्वरूप, मैं समर्थी स्वरूप
अटल हो
अतल हो
नवल हो
सफल हो
सौंदर्य हो
ऐश्वर्य हो
वीर हो
महावीर हो
श्रेष्ठ हो
ज्येष्ठ हो
पूज्य हो
पुर्वज हो
रूप हो
बसंत हो
ज्ञान हो
विज्ञान हो
शांति हो
क्रांति हो
साकार हो
निराकार हो
मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...
आत्मा को देख बात करना है,
आत्मा से आत्मा बात कर रहा है।
आत्मा देख रहा है।
तो वृत्ति सदा ही शुभ रहेगी।
मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...मैं आत्मा हूँ...