सारे विश्व का अंधियारा मिटाने के लिए ।
हर आत्मा की ज्योति जगाने के लिए ।
शिव जयंती की पावन वेला फिर से आई है ।
सुख शांति समृद्धि की रोशनाई लाई है ।
जब तक संगमयुग में जीना,यही व्रत रखना है ।
मन वचन कर्म से पवित्र ही रहना है ।
मैं पण की बलि देकर ये जीवन किया समर्पण है ।
विशेषताएं प्रभु देन सेवा में किये अर्पण है ।
मैं और मेरा हो खत्म ..
अब हम बाबा की गोदी में ही जीते रहेंगे ।
फिर हम देवताई गोदी में भी पलते रहेंगे ।
बाबा संग अपने जन्म दिन की बधाई पाई है ।
शिव जयंती की पावन वेला फिर से आई है ।
हिम्मत से ही मिले मदद , यही वदान मिला है ।
उमंग और उत्साह से जीवन बाग खिला है ।
बाबा के हम राजा बच्चे स्वराज्य के अधिकारी हैं।
भविष्य विश्व राजन और पूजन के अधिकारी हैं।
संगम की बलिहारी है..
ज्योति बिन्दु बाबा की हम बिन्दु है संतान ।
जो भी बीता उसे लगाए बिन्दु का विराम ।
इन तिन बिंदी की कमाल बाबा ने बताई है ।
शिव जयंती की पावन वेला फिर से आई है ।
शुभ भाव और भावना से हर संबंध में आए ।
खुशियों की दिल खुश टोली सब को ही खिलाए ।
सहयोग देकर सब को सहयोगी बनाना है ।
हर श्वाश में विश्व सेवा करते ही रहना है । दाता बनकर देना है ..
सदा चेहरा हो अपना मुस्कराता हुआ ।
अपने दैवी स्वरूप से हर्षाता हुआ ।
हम है प्रभु के नूर बाबा ने ही महिमा गाई है ।
शिव जयंती की पावन वेला फिर से आई है ।
सुख शांति समृद्धि की रोशनाई लाई है ।
