िव पिता परमात्मा शांत मन करे
तेरी यादों के साये में श्र्वासो के तार चले
शिव पिता परमात्मा शांत मन करे
तेरी यादों के साये में श्र्वासो के तार चले
शिव पिता परमात्मा
ऐसा मधुर मिलन कहा देखेगा आदमी
ऐसा मधुर मिलन कहा देखेगा आदमी
ब्रह्मा मुख से प्रवचनों से धरती है थमी
निर्मल शीतल वचन से हृदय में आकर आ बसे
तेरे यादों साये में श्र्वासो के तार चले
शिव पिता परमात्मा
स्नेह और ममता के शिखर पर बिंदु चमक रहा
स्नेह और ममता के शिखर पर बिंदु चमक रहा
ज्योतिर्मय प्रकाश से मन उज्वल कर रहा
अंतर नयन जब खुले दृष्टि से दृष्टी मिले
तेरी यादों के साये में श्र्वासो के तार चले
शिव पिता परमात्मा
जिस तन लगे वो मन जाने प्रभु है करुणा निधार
जिस तन लगे वो मन जाने प्रभु है करुणा निधार
तेरे परिचय से यू लगता मानो चले सुखधाम
याद पिता की खोल दो उल्लास भरी चल के
तेरी यादों के साये में श्र्वासो के तार चले
शिव पिता परमात्मा शांत मन करे
तेरी यादों के साये में श्र्वासो के तार चले
शिव पिता परमात्मा
