"शिव पिया मिलन ऋतु आई
शिव पिया मिलन ऋतु आई
शिव पिया मिलन ऋतु आई
शिव पिया मिलन ऋतु आई
दृष्टी में सृष्टि भर लाई
दृष्टी में सृष्टि भर लाई
मैं तो खुद से हुई पराई
मैं तो खुद से हुई पराई
छलके लबों से अमृत वाणी
छलके लबों से अमृत वाणी
जन्मों की प्यास बुझाई
शिव पिया मिलन ऋतु आई
शिव पिया मिलन ऋतु आई
अमृतवेला ब्रम्ह मुहूर्त
अमृतवेला ब्रम्ह मुहूर्त
मैं देखी पिया जी की सुरत
मैं देखी पिया जी की सुरत
सूर्य हजार ललाट लिए है
सूर्य हजार ललाट लिए है
सुरमई प्रभात लिए है
सुरमई प्रभात लिए है
मैं खुद में खुदा समा लाई
मैं खुद में खुदा समा लाई
शिव पिया मिलन ऋतु आई
शिव पिया मिलन ऋतु आई
दादर मोर किसान को मन
दादर मोर किसान को मन
लाग्यो रहे घनमाए
लाग्यो रहे घनमाए
अमृत बरसाए पियाज़ी
अमृत बरसाए पियाज़ी
धरणी रूप बसंत मनाए
धरणी रूप बसंत मनाए
वे उनकी हथेली पे ले आई
वे उनकी हथेली पे ले आई
शिव पिया मिलन ऋतु आई
शिव पिया मिलन ऋतु आई"
