"पिता गुरु और सतगुरु है ये
पिता गुरु और सतगुरु है ये
तीनो रूप तुम्हारे शिवजी
तीनो रूप तुम्हारे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
परमपिता बन वरसा देने
संगमयुग पर आते है
संगमयुग पर आते है
माता होकर जन्म मरजीवा
हम बच्चो को देते है
हम बच्चो को देते है
पुरुषार्थ बन चलेंगे हरदम
श्रीमत पर ही तेरे शिवजी
श्रीमत पर ही तेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
गुरुगोसायी लौकिक जग के झूठे तीर्थ कराए
पंडा बन यह बाबा हमको सच्ची राह बताए
गुरुगोसायी लौकिक जग के झूठे तीर्थ कराए
पंडा बन यह बाबा हमको सच्ची राह बताए
अज्ञानी बन फेरे अबतक
चौरासी के फेरे शिवजी
चौरासी के फेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवरात्रि के शुभ अवसर पर
ब्रम्हा तन में आते है
ब्रम्हा तन में आते है
रावण का यह राज्य मिटाकर
मुक्तिधाम ले जाते है
मुक्तिधाम ले जाते है
गुरुओं के गुरु सतगुरु पाकर
खुल गए भाग हमारे शिवजी
खुल गए भाग हमारे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
शिवजी मातपिता मेरे
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