

करोड़ों अरबों में न ऐसा कोई और रत्न हुआ ईश्वरीय माध्यम बन जिन्होंने रत्न लाखों चमकाए जिनकी परम साधना पर प्रकृति भी सर झुकाए विशेषताओंकी खान जिनपर स्वयं भगवान वारी जाए परमात्माकी अति लाडली सर्वप्रिय रतन मोहिनी दादीजी विश्वजागृतिके लिए गहन तप की बनी आप पर्यायी देश विदेश से जिन्हें निहार ने हर मन कण कण दौड़ा आता ईश्वर की सच्ची गोपिका नियम मर्यादा जीवन से सिखलाई देह छोड़ आतमपंछी चला ईश्वर से मिलने निर्बंधन इस लोक से अब सूक्ष्म उत्कृष्ट सेवा करने ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रमुख देवी स्वरूपा शतायु दादी रतनमोहिनी जी को हम सब श्रद्धांजलि हृदयांजलि पुष्पांजली अर्पित करते है दादीजी आप सदा हमारे साथ है आपकी शिक्षाएं सदा हमारा जीवन उज्वल बनाती रहेगी