इस धरा पे फिरसे स्वर्ग आयेगा जन्नत अब ये जहाँ कहलाएगा
इस धरा पे फिरसे स्वर्ग आयेगा जन्नत अब ये जहाँ कहलाएगा
आयेगा प्यारा कृष्ण कन्हैया
सब का वो प्यारा कृष्ण कन्हैया
हीरे मोती माणिक से नूर होगा
एक दो में प्रेम भरपूर होगा
श्रेष्ठ संस्कारों का रास होगा
सृष्टि का वो समय भी खास होगा
आयेगा प्यारा कृष्ण कन्हैया
सब का वो प्यारा कृष्ण कन्हैया
चाहत अपनी हर एक मनके विश्व एक बनें
इर्ष्या द्वेष के तोड़े मटके हम सब नेक बने
शुभ संकल्प की बगिया बनाकर जीवन महकाए
सत्कर्मों की राहों पर चल पुण्य कमा धन खाये
आए भाग्यविधाता शिव वरदाता इस धरा को कर दे स्वर्ग सा पावन
एक धर्म और एक राज्य होगा
भारत पर हम सबको नाज़ होगा
हर एक सर पर ताज़ होगा
घर घर में खुशियों का साज़ होगा
आयेगा प्यारा कृष्ण कन्हैया
सब का वो प्यारा कृष्ण कन्हैया
इस धरा पे फिरसे स्वर्ग आयेगा जन्नत अब ये जहाँ कहलाएगा
आयेगा प्यारा कृष्ण कन्हैया
सब का वो प्यारा कृष्ण कन्हैया
हीरे मोती माणिक से नूर होगा
एक दो में प्रेम भरपूर होगा
श्रेष्ठ संस्कारों का रास होगा
सृष्टि का वो समय भी खास होगा
आयेगा प्यारा कृष्ण कन्हैया
सब का वो प्यारा कृष्ण कन्हैया
