स्नेह का दिन है स्नेही के संग रहने का ब्रह्मा बाप की गौरव गाथा गाने का
स्नेह के पुष्प उनको अर्पण करने का
स्नेह के सागर में ही समाकर खो जाएं स्नेह के आगे पर्वत भी पानी हो जाएं
स्नेह की छत्र छाया में माया न आ पाएं
बाप समान सम्पन्न संपूर्ण बनने का
स्नेह का दिन है स्नेही के संग रहने का
ब्रह्मा बाबा आज भी साथ निभाए
जैसे गोपी संग कन्हैया रास रचाएं
बाबा वतन से वाह बच्चें वाह यही गाए
अव्यक्त रूप से हम बच्चों को रिझाने का
स्नेह का दिन है स्नेही के संग रहने का
मेहनत से सदा मुक्त हमें अब होना है
हार जीत का खेल अभी नहीं करना है
संगम युग में मौजों में ही जीना है
समय के पहले हम बेहद के वैरागी बने लगाव मुक्त हो ब्रह्मा समान हम ज्ञानि बने
यही समय है सबको सकाश देने का
स्नेह का दिन है स्नेही के संग रहने का
स्नेह के पुष्प उनको अर्पण करने का
ब्रह्मा बाप की गौरव गाथा गाने का
