सुन सखी सुन सखी
मैंने अचंभा अपनी आंखो देखा है देखा है
सुन सखी सुन सखी
मैंने अचंभा अपनी आंखो देखा है देखा है
एक नया संसार प्रभु को मैंने रचते
देखा है देखा है
सुन सखी सुन सखी
आबू पर्वत के शिखर पर ज्ञान सूरज है उदय
आबू पर्वत के शिखर पर ज्ञान सूरज है उदय
प्यार का सागर छलकता सज्जनों पर है सदैव
परम ज्योतीपुंज धरतीपर उतरते देखा है
देखा है
सुन सखी सुन सखी
मंदिरों की देवियां खुद विश्व सेवा कर रही
मंदिरों की देवियां खुद विश्व सेवा कर रही
वक्त के पर्दे के पीछे
वक्त के पर्दे के पीछे
दिव्य गुण से सज रही
दिव्य गुण से सज रही
शिव की चेतन शक्तियां सब पे बिखरते देखा है देखा है
सुन सखी सुन सखी
बज रही मुरली अनोखी बन रहा गोकुल नया
बज रही मुरली अनोखी बन रहा गोकुल नया
बह रही जमुनाके जलसे प्रीति करुणा और दया
गोप गोपी संग प्रभुको रास करते देखा है
देखा है
सुन सखी सुन सखी
चल दिखादू मै जहा भगवान लिखता भाग्य है
चल दिखादू मै जहा भगवान लिखता भाग्य है
युग बदलता करवटे
युग बदलता करवटे
जग रहा अब जाग है
जग रहा अब जाग है
वो खुली आंखो का सपना सत्य होते देखा है
देखा है
सुन सखी सुन सखी
मैंने अचंभा अपनी आंखो देखा है देखा है
एक नया संसार प्रभु को मैंने रचते देखा है
देखा है
सुन सखी सुन सखी
सुन सखी सुन सखी
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