

"स्वागत आपका....सम्मान आपका..... आप जो आये, हमको हुई है इतनी खुशी जैसे चंदा मुस्कराये, शीतल किरणें फैलाये मंगल मय मधुर स्वर से, ऐसा मन हर्षाये प्रभु प्यार है बरस रहा, हमपे पावन पावन स्नेह पुष्प से महक उठा, पाकर प्रभु का दामन आपका अभिनन्दन, आपका अभिवादन आपका अभिनन्दन, आपका अभिवादन ऊं ऊंं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं .... संगम युग की... ये पावन बेला, हुआ है स्नेह मिलन का मेला परिवर्तन की....ये पुरवाई, स्वर्णिम भोर लाई की लाई मन का दर्पण हो रहा है अब तो निर्मल निर्मल प्रभु स्मृति से खिल उठा है,जैसे खिलता कमल आपका अभिनन्दन, आपका अभिवादन आपका अभिनन्दन, आपका अभिवादन ऊंं ऊंं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ..... प्रिय जनों का.... शुभागमन से....धरा अंबर ये झूम रहे हैं खुशियों में है, मगन ये कण-कण, शुभभावना में चहक रहे हैं, खुद की ज्योति जगा के आओ,सबकी हम जगायें प्रेम एकता, पवित्रता के स्वर से स्वर मिलायें जैसे चंदा मुस्कराये, शीतल किरणें फैलाये मंगलमय मधुर स्वर से, ऐसा मन हर्षाये जैसे चंदा मुस्कराये, शीतल किरणें फैलाये मंगलमय मधुर स्वर से, ऐसा मन हर्षाये आपका अभिनन्दन, आपका अभिवादन आपका अभिनन्दन, आपका अभिवादन आपका अभिनन्दन, आपका अभिवादन आपका अभिनन्दन, आपका अभिवादन"