

स्वयं भगवान गाए महिमाा इतना महान जीवन अपना श्रेष्ठ विशेष ये ब्राह्मण धर्म दाता विधाता से मिला है जनम ब्रम्हा बाबा और प्यारे शिव पिता की हम है रचना स्वयं भगवान गाए महिमाा इतना महान जीवन अपना ब्राह्मण जनम का श्रेष्ठ कर्म भाग्य की रेखा की है ये कलम ब्रम्हा बाबा ही आदर्श हमारा कर्मों के द्वारा जीवन संवारा निराकार बने शिव बाबा समान साकार कर्म हो ब्रम्हा समान बने फरिश्ता लक्ष्य हमारा ऐसे लक्षण करे धारण बाबा समान बन करके समाप्ति के समय को समीप लाना स्वयं भगवान गाए महिमाा इतना महान जीवन अपना संकल्प वाणी और वृत्ति में कही हद का आकर्षण न रहे कोई अपनी विशेषता स्मृति में रहे स्मृति सो समर्थि की स्थिति ही रहे सबके संग में सर्व संबंध में हल्के रहे जैसे फरिश्ता अपनी स्थिति हो शक्तिशाली दृढ़ता से ही मिले सफलता श्रेष्ठ जनम श्रेष्ठ धरम श्रेष्ठ कर्म सदा इस श्रेष्ठ स्मृति में ही रहना स्वयं भगवान गाए महिमाा इतना महान जीवन अपना श्रेष्ठ विशेष ये ब्राह्मण धर्म दाता विधाता से मिला ये जनम ब्रम्हा बाबा और प्यारे शिव पिता की हम है रचना स्वयं भगवान गाए महिमाा इतना महान जीवन अपना