

"श्वेत वस्त्रधारिणी सुभाषिनी सुलक्षणी श्वेत वस्त्रधारिणी सुभाषिनी सुलक्षणी शिव पिताकी नंदनी रुद्र यज्ञ रक्षिणी ऐसी विरनंदनी हम सभी की वंदनीय श्वेत वस्त्रधारिणी सुभाषिनी सुलक्षणी जिनकी मुख की कांति से फैलती है चांदनी जिनकी मुख की कांति से फैलती है चांदनी मुख से झरते ज्ञान सदा ज्ञान की प्रचारिणी प्रेरणा की स्रोत है ये सेवा में भी अग्रणी प्रेरणा की स्रोत है ये सेवा में भी अग्रणी ऐसी विरनंदनी हम सभी की वंदनीय श्वेत वस्त्रधारिणी सुभाषिनी सुलक्षणी नेह की फुहारोंसे नहा नहा के आत्मन कर रहे है वंदना व दादियों का आचमन गंगा जैसी पावनी है ये मायामर्दनी ऐसी विरनंदनी हम सभी की वंदनीय श्वेत वस्त्रधारिणी सुभाषिनी सुलक्षणी ब्राम्हणों की मान है शिव पिता की जान है ब्राम्हणों की मान है शिव पिता की जान है आदि से अंत तक यज्ञ की ये शान है आदि से अंत तक यज्ञ की ये शान है तीन लोको की दुलारी दुर्गे काली लक्ष्मी तीन लोको की दुलारी दुर्गे काली लक्ष्मी ऐसी विरनंदनी हम सभी की वंदनीय श्वेत वस्त्रधारिणी सुभाषिनी सुलक्षणी शिव पिताकी नंदनी रुद्र यज्ञ रक्षिणी ऐसी विरनंदनी हम सभी की वंदनीय ऐसी विरनंदनी हम सभी की वंदनीय ऐसी विरनंदनी हम सभी की वंदनीय