जग से न्यारा पथ है तेरा,
राह कठिन, धूप घनी है,
हर पल हो नया सवेरा।
सूरज बन जलना होगा — बस, यही तो तप है तेरा।
माटी से न हो कोई नाता,
राग-द्वेष से न्यारा जीवन,
मौन का बरसे अमृत सावन,
हर कर्म बने योग तेरा।
जग से न्यारा पथ है तेरा,
सूरज बन जलना होगा — बस, यही तो तप है तेरा।
कदम-कदम पर अग्नि बिछी है,
हर बाधा को झुकाना होगा,
तप का ताज पहनना होगा।
वैराग्य बने श्रृंगार तेरा।
जग से न्यारा पथ है तेरा,
सूरज बन जलना होगा — बस, यही तो तप है तेरा।
तपस्वी! अब समय यही है,
त्याग की मशाल जलानी होगी,
परम लक्ष्य को पाना होगा।
साधना ही उत्सव तेरा।
जग से न्यारा पथ है तेरा,
सूरज बन जलना होगा — बस, यही तो तप है तेरा।
सुख-सुविधा से मन न डोले,
वैराग में हो हर्ष तेरा,
रोम-रोम में तप की गाथा,
बस, शिव से ही नाता तेरा।
संयम बने अभ्यास तेरा।
सूरज बन जलना होगा — बस, यही तो तप है तेरा।
