तेज चल दिए राह पे अपनी पाने उन्नती के शिखर
तेज चल दिए राहो पे अपनी पाने उन्नती के शिखर
भूल गए हम क्या कर रहे है अंजाम से है बेखबर
तेज चल दिए राह पे अपनी पाने उन्नती के शिखर
विकास के नाम पर जो कर रहे विनाश
दिशा दिशा है हताश गगन भी क्यों उदास
आज ही संकल्प ले करे नया सृजन
मिटा देंगे निराशा को जहां को कर रोशन
मैली ए पवन प्यासी नदियों की दोनो करुण पुकार
सुधरे नही जो आज हम तो मचेगा फिर हाहाकार
जल ही जीवन जान लो स्वच्छता है उपचार
पेड़ों की तुम रक्षा करो हर प्राणी को दरकार
हजारों पेड़ लगाओ खुद ही खुश रहना चाहते अगर
विकास के नाम पर जो कर रहे विनाश
दिशा दिशा है हताश गगन भी क्यूं उदास
आज ही संकल्प ले करे नया सृजन
मिटा देंगे निराशा को जहां को कर रोशन
देश की प्रगति की खातिर जंगल को किया वीरान
अपने सपनो का महल सजाने किया धरा रेगिस्तान
दूषित किया पांच तत्वों को जिनसे ये देह मकान
वही प्रकृति के तांडव से जग बन रहा शमशान
संतुलन अब लाना है तो प्रकृति का करे आदर
विकास के नाम पर जो कर रहे विनाश
दिशा दिशा है हताश गगन भी क्यूं उदास
आज ही संकल्प ले करे नया सृजन
मिटा देंगे निराशा को जहां को कर रोशन
तेज चल दिए राह पे अपनी पाने उन्नती के शिखर
तेज चल दिए राह पे अपनी पाने उन्नती के शिखर
भूल गए हम क्या कर रहे है अंजाम से है बेखबर
तेज चल दिए राह पे अपनी पाने उन्नती के शिखर
हा तेज चल दिए राहो पे अपनी पाने उन्नती के शिखर
हो तेज चल दिए राह पे अपनी पाने उन्नती के शिखर
तेज चल दिए राह पे अपनी पाने उन्नती के शिखर
