

उडो अब बिंदु बनकर देह अभिमान तजकर उड़ चलो पार गगन वहीं है अपना वतन उडो अब बिंदु बनकर देह अभिमान तजकर उड़ चलो पार गगन वहीं है अपना वतन उडो अब बिंदु बनकर लालिमा बिखरी है ज्ञान का है सुरज यहीं लालिमा बिखरी है ज्ञान का है सुरज यहीं आ बसे मिलने को मन मैं अब धिरज नही मन में अब धिरज नही मन में अब धिरज नही ओ बाबा बाहें फैलाए हर घड़ी मुस्कराते मना लो मनसे मिलन मना लो मनसे मिलन उड़ चलो पार गगन वहीं है अपना वतन उडो अब बिंदु बनकर देह अभिमान तजकर उडो अब बिंदु बनकर है बाबा सब से निराले वो संगम पर ही है आंतें है बाबा सबसे निराले वो संगम पर ही है आंतें बनो संपन्न भक्तों हमे देते इशारे हमे देते इशारे हमे देते इशारे अनुभव से है कहते बाबा का संदेश देते बनाते स्वर्णिम चमन बनाते स्वर्णिम चमन उड चलो पार गगन वहीं है अपना वतन उडो अब बिंदु बनकर देह अभिमान तजकर उडो अब बिंदु बनकर देह अभिमान तजकर उड़ चलो पार गगन वहीं है अपना वतन उडो अब बिंदु बनकर देह अभिमान तजकर उडो अब बिंदु बनकर देह अभिमान तजकर