कमाल है बाबा का और कमाल है हमारे भाग्य का — हम हीरे जैसा बेदाग जीवन बनाने के लिए बाबा के सामने बैठे हैं। जीवन में सच्चाई और सफाई हो, जरा भी दाग न हो।
तपस्या का प्रैक्टिकल स्वरूप है — इच्छा मात्रम अविद्या। बिना त्यागी बने तपस्वी नहीं बन सकते। जब लक्ष्य बुद्धि में स्पष्ट हो, तो आँख कहीं नहीं भटकती। त्यागी आत्मा ही सम्पन्न बनती है। तपस्या हमें हर बात में एक्यूरेट और ऑल-राउंडर बनाती है।
देह-अभिमान छोड़कर अशरीरी बनना मेहनत का काम है, लेकिन जब सर्वशक्तिमान बाप से शक्ति मिलती है, तो आत्मा सहज ही उड़ती हुई अशरीरी अवस्था का अनुभव करती है।
बाबा के प्यार का आकर्षण और अशरीरीपन का अनुभव आत्मा को सच्चा स्नेही बना देता है। यही आकर्षण आत्मा को उड़ती कला सिखाता है।
जिसे एक बाबा से ही लगन है, उसका प्रभाव उसके संपर्क में आने वालों पर भी पड़ता है — वे भी बाबा से जुड़ने लगते हैं।
फॉलो फादर का अर्थ है — हर कर्म से पहले बाबा को सामने रखना। तभी वैजयंती माला में स्थान मिलता है। इसके लिए पहले अलंकारी (चार भुजाधारी) बनना आवश्यक है।
