

वैराग्य वृत्ति को जीवन में करे हम धारण समय की है ये पुकार सुन ले हे आत्मन वैराग्य हो अपने पुराने संस्कारों से देहभान के इन सारे किनारों से सेवाओ की सफलता का है यहीं तूफान वैराग्य वृत्ति को जीवन में करे हम धारण वैराग्य वृत्ति को करे हम धारण ब्राह्मण जीवन में खुशी की सांस है अपना सदा काल का यही अहसास है अपना सेवा के उमंग में ना रहे कोई कसर बेहद के वैराग्य वृत्ति की इसमें हो लहर वैराग्य हो सदाकाल का देहभान के जंजाल का समय के पहले बदलने का लक्ष्य रहे संस्कारों के वंश का भीअंश ना रहे बाबा है शिक्षक हमारा समय है रचना ना छुप जाए अपनी ये वैराग्य की साधना वैराग्य वृत्ति से बदल दे हम ये जहां समय की है ये पुकार सुन ले हे आत्मन वैराग्य वृत्ति को करे हम धारण अशरीरी बनने का है वैराग्य ही आधार वैराग्य ही धरणी है बनना ही अपार बाबा के संतान सच्चे योगी है हम संकल्प शक्ति से करें अब व्यर्थ को खतम दिलाराम के दिलतख्त पर सदा अधिकार है अपना उम्रभर सदा वैराग्य वृत्ति को जीवन में करे हम धारण समय की है ये पुकार सुन ले हे आत्मन वैराग्य हो अपने पुराने संस्कारों से देहभान के इन सारे किनारों से सेवाओ की सफलता का है यहीं तूफान वैराग्य वृत्ति को जीवन में करे हम धारण वैराग्य वृत्ति को करे हम धारण